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विरोध के बाद आज पहली बार BHU में नजर आएंगे संस्कृत प्रोफेसर फिरोज खान, इंटरव्यू में होंगे शामिल
November 29, 2019 • विशेष प्रतिनिधि

इससे पहले बीएचयू के जनसूचना अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि फिरोज खान ने यूनिवर्सिटी के कई विभागों में आवेदन किया हुआ है. डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि फिरोज खान ने आयुर्वेद विभाग में पहले से ही आवेदन कर रखा था.

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ( (Banaras Hindu University)) के संस्कृत धर्म संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान (Dr Feroz Khan) का शुक्रवार को आयुर्वेद विभाग में इंटरव्यू है. वहीं छात्रों के विरोध के बाद फिरोज खान आज पहली बार बीएचयू कैंपस में नजर आएंगे. दरअसल फिरोज खान ने बीएचयू के दो विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन किया था. पहला संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में और दूसरा आयुर्वेद विभाग में. संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में फिरोज खान की नियुक्ति हो गई, जिसके बाद कुछ छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया था.

इससे पहले बीएचयू के जनसूचना अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि फिरोज खान ने यूनिवर्सिटी के कई विभागों में आवेदन किया हुआ है. डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि फिरोज खान ने आयुर्वेद विभाग में पहले से ही आवेदन कर रखा था.
एचयू ने निकाला था विज्ञापन

बीएचयू की वेबसाइट के मुताबिक मई 2019 विज्ञापन निकाला था. इसमें आवेदन की अंतिम तारीख 26 जून थी. इस वैकेंसी में साहित्य विभाग के अलावा आईएमएस के आयुर्वेद संकाय के संहिता और संस्कृत विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर, कला संकाय के संस्कृत विभाग, शिक्षा संकाय के शिक्षा विभाग, म्यूजिकोलॉजी विभाग और राजीव गांधी साउथ कैंपस बरकछा मिर्जापुर में संस्कृत से संबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन निकला था.

छात्रों ने किया था फिरोज खान का विरोध

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत धर्म संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में बीते 15 दिनों से जारी धरना 22 नवंबर को खत्म हो गया. धरने का नेतृत्व कर रहे छात्र चक्रपाणि ओझा ने कहा कि कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा इस मामले में उचित कदम उठाया जाएगा. चक्रपाणि ओझा ने कहा कि वे प्रोफेसर फिरोज खान का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि उनका विरोध नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता के खिलाफ है. वहीं छात्रों ने कहा कि हमारा विरोध नियुक्त प्रोफेसर द्वारा संस्कृत पढ़ाने को लेकर नही हैं. हमारा विरोध बस इतना है कि जो हमारी रीत, संस्कार को जानता ही नहीं वो शिक्षा कैसे देगा.