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सपा, बसपा ने सोनिया गाँधी की मीटिंग से किया किनारा, आप ने कहा- कॉन्ग्रेस ने बुलाया ही नहीं
May 23, 2020 • विशेष प्रतिनिधि

कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूरों और महामारी से निपटने के लिए सरकार की नीतियों पर चर्चा करने के लिए सोनिया गाँधी ने शुक्रवार को यह मीटिंग बुलाई थी।

कॉन्ग्रेस की घटती साख का इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अब विपक्षी दलों को भी लामबंद करने में कामयाब नहीं हो पा रही है। सोनिया गॉंधी की ओर से बुलाई गई 18 विपक्षी दलों की मीटिंग से सपा, बसपा और आप जैसे दलों ने किनारा कर लिया है।

कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूरों और महामारी से निपटने के लिए सरकार की नीतियों पर चर्चा करने के लिए सोनिया गाँधी ने शुक्रवार (मई 22, 2020) को यह मीटिंग बुलाई थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, दोनों पार्टियों ने विपक्ष की इस महाबैठक में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। लेकिन संसद में दोनों पार्टिंयाँ विपक्ष का समर्थन करने के लिए अपने पार्टी प्रतिनिधियों को भेजेगी।

इसके अलावा, आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि उन्हें सोनिया गाँधी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। वहीं, शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि इस बैठक के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल होंगे।

जानकारी के मुताबिक, विपक्ष की इस बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन, डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन भी भाग लेंगे।

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोनिया गाँधी द्वारा बुलाई विपक्ष की बैठक का निमंत्रण स्वीकार कर लिया था। लेकिन वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने में व्यस्त रहीं।

बसपा सुप्रीमो ने कॉन्ग्रेस पर जताई नाराजगी

गौरतलब है कि इस बैठक में सपा-बसपा के न शामिल होने के कारण काफी कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन ध्यान दिला दें कि इस मीटिंग से पहले बसपा प्रमुख मायवती ने ट्विटर पर राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के फैसले नाराजगी जाहिर की थी।

उन्होंने लिखा था, “राजस्थान की कॉन्ग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो माँग की है वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है।”

इसके बाद अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कॉन्ग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है, तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय है।”