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चार्जशीट: उकसाकर ताहिर हुसैन ने किया भीड़ का नेतृत्व, IB के अंकित शर्मा को मारे गए थे 51 बार चाकू
June 4, 2020 • विशेष प्रतिनिधि

दिल्ली हिंसा  की चार्जशीट के अनुसार, ‘अभियुक्त ताहिर हुसैन  24 और 25 फरवरी को अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से उकसाकर भीड़ का नेतृत्व किया और इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया’.

नई दिल्ली. दिल्ली हिंसा के संबंध में पुलिस ने बुधवार एक अदालत में अपनी चार्जशीट पेश की. आरोप पत्र के अनुसार, ‘अभियुक्त ताहिर हुसैन 24 और 25 फरवरी को अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भीड़ का नेतृत्व किया और इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया’. पुलिस ने कहा कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा  की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उन्हें 51 बार चाकू मारने की बात सामने आई है. ताहिर हुसैन के घर से कुछ ही दूरी पर नाले से अंकित शर्मा की डेड बॉडी बरामद हुई थी.

पेट्रोल बम बरसाए और उनके घरों को भी निशाना बनाया
चार्जशीट के अनुसार, ताहिर हुसैन ने यह कहते हुए हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों को उकसाया कि हिंदुओं ने कई मुसलमानों को मार दिया है और शेरपुर चौक पर उनकी दुकानों में आग लगा दी है और किसी भी हिंदू को नहीं बख्शा जाए. उसके उकसावे पर, मुसलमान 24 और 25 फरवरी को हिंसक और बेकाबू हो गए और उन्होंने दुकानों को जलाना शुरू कर दिया और हिंदुओं पर पथराव किया और पेट्रोल बम बरसाए और उनके घरों को भी निशाना बनाया.

अंकित शर्मा की हुई थी बर्बरतापूर्ण हत्या

पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र में कहा गया है कि आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन की जामा मस्जिद और उतर पूर्वी दिल्ली के मूंगा नगर की कॉल लोकेशन उसके 'शैतानी इरादों' की कहानी बयां करते हैं. मूंगा नगर में 25 फरवरी को बलवाइयों ने आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी. मूंगा नगर में ही आगजनी और लूटपाट के कई मामले सामने आए और एक हिंदू लड़के की हत्या कर दी गई.

अपने परिवार को मुस्तफाबाद भेजकर खुद वहीं रहा ताहिर

पुलिस ने अपने आरोप पत्र में कहा कि दंगाइयों ने शर्मा को कथित रूप से घसीटा, कई बार चाकू मारे और फिर नाले में फेंक दिया. आरोप पत्र में हुसैन को फरवरी में उतर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के कथित साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया गया है. शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उन्हें 51 बार चाकू मारने की बात सामने आई है. आरोप पत्र में कहा गया है, 'ताहिर हुसैन ने 24-25 फरवरी की दरम्यानी रात में अपने परिवार को मुस्तफाबाद में अपनी पैतृक आवास पर भेज दिया और खुद वहीं रहा ताकि पूरे हालात पर नजर रख सके और अगले दिन हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों के साथ खड़ा रहे.'