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बाराबंकी: 22 सालो से शिक्षक की फर्जी नौकरी करने वाले दबोचे गए मुकदमा दर्ज
November 10, 2019 • विशेष प्रतिनिधि

बाराबंकी: फर्जीवाड़े के सहारे शिक्षक पद की नौकरी करने वाले पिता पुत्र गिरफ्तार किए है। पिता 22 साल तो बेटा 9 साल तक विभाग को चकमा देता रहा इस दौरान दोनों ने लाखों का चूना लगाया। मामला हैदरगढ़ कोतवाली इलाके का है। पुलिस ने गिरजेष त्रिपाठी उर्फ जयकृष्ण दूबे पुत्र राम प्रसाद त्रिपाठी निवासी गोपालपुर, थाना झंगहा, गोरखपुर, आदिषक्ति त्रिपाठी उर्फ रविकाषंकर त्रिपाठी पुत्र गिरजेष त्रिपाठी उर्फ जयकृष्ण दूबे नि0 गोपालपुर, थाना झंगहा, गोरखपुर को हिरासत में ले लिया है।

एसटीएफ को विगत दिनांे से बेसिक शिक्षा विभाग मे दूसरे के शैक्षिक प्रमाणपत्रों व फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर अपनी फोटो लगाकर उसी व्यक्ति के नाम पर नियुक्ति प्राप्त कर नौकरी किये जाने की सूचनायें प्राप्त हो रही थी। उक्त सचूना पर एसएसपी राजीव नारायण मिश्र द्वारा एएसपी सत्यसेन यादव को बेसिक शिक्षा विभाग में दूसरों के प्रमाण पत्रों के आधार पर फर्जी नियुक्त शिक्षकों के विषय में जानकारी व आवष्यक कार्यवाही करने हेतु निद्रेषित किया गया था।

इस सम्बन्ध में अभिसूचना संकलन हेतु निरीक्षक विजेन्द्र शर्मा व प्रमोद वर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित की गयी। अभिसूचना संकलन के दौरान ज्ञात हुआ कि जनपद बाराबंकी के हैदरगढ़ ब्लाक अन्तर्गत जयकृष्ण दूबे नामक व्यक्ति वर्ष 1997 से सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत है तथा इसका पुत्र वर्ष 2010 सेे रविषंकर त्रिपाठी के नाम से सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे है। जबकि इनका असली नाम क्रमषः गिरजेष कुमार त्रिपाठी व आदिषक्ति त्रिपाठी है जो गोपालपुर, थाना झंगहा, गोरखपुर के निवासी है। इस सूचना पर दिनांक 09.11.2019 को जनपद बाराबंकी के बीएसए कार्यालय के पास से एसटीएफ टीम द्वारा दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर बीएसए कार्यालय, बाराबंकी ले जाया गया जहां श्री वी0पी0 सिंह, बेसिक षिक्षा अधिकारी व खण्ड षिक्षाअधिकारियों के समक्ष गहनता से पूछताछ व इनके दस्तावेजों की जांच की गयी तो गिरजेष त्रिपाठी ने गलती स्वीकार करते हुए बताया कि वर्ष 1997 में गोरखपुर खजनी निवासी एक व्यक्ति के माध्यम से फर्जी तरीके से जयकृष्ण दूबे नाम से सभी शैक्षणिक दस्तावेज की फर्जी मूल जैसी प्रति बनवा लिया था, जिसके एवज में रू0 2 लाख दिया था। इन्ही प्रमाण पत्रों पर अपनी फोटो लगाकर जनपद-बलरामपुर में वर्ष 1997 में आवेदन कर नौकरी प्राप्त कर लिया था। तब से लगातार नौकरी कर रहा था। इसी प्रकार उसने अपने बेटे आदिषक्ति त्रिपाठी को रविषंकर त्रिपाठी नाम से फर्जी प्रमाण पत्र व शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर अपने पुत्र की फोटो लगाकर आवेदन कर वर्ष 2010 में जनपद बाराबंकी में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति करा लिया था। इसके एवज में भी रू0 4 लाख उसी व्यक्ति को दिया था। गिरफ्तार अभियुक्तों के विरूद्ध कोतवाली बाराबंकी जनपद-बाराबंकी में अभियोग पंजीकृत कराकर अग्रिम विधिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।